हिन्दू धर्म
ऋग्वेद · 10.117.1–3
न वा उ देवाः क्षुधमिद्वधं ददुरुताशितमुप गच्छन्ति मृत्यवः । उतो रयिः पृणतो नोप दस्यत्युतापृणन्मर्डितारं न विन्दते ॥१॥ य आध्राय चकमानाय पित्वोऽन्नवान्सन्रफितायोपजग्मुषे । स्थिरं मनः कृणुते सेवते पुरोतो चित्स मर्डितारं न विन्दते ॥२॥ स इद्भोजो यो गृहवे ददात्यन्नकामाय चरते कृशाय । अरमस्मै भवति यामहूता उतापरीषु कृणुते सखायम् ॥३॥
ईश्वर ने भूख को हमारी मृत्यु का कारण नहीं बनाया है: भरपेट भोजन करने वाले व्यक्ति को भी मृत्यु अनेक रूपों में प्राप्त होती है। उदार व्यक्ति का धन कभी नष्ट नहीं होता, जबकि दान न करने वाले को कोई सांत्वना देने वाला नहीं मिलता। वह व्यक्ति जिसके पास भोजन भंडार है, जब कोई जरूरतमंद रोटी मांगने आता है, तो वह उसके प्रति कठोर हृदय कर लेता है—भले ही उसने अतीत में उसकी सेवा की हो—उसे सांत्वना देने वाला कोई नहीं मिलता। उदार है वह जो भोजन की कमी और दुर्बलता में आए भिखारी को दान देता है। युद्ध के संघर्ष में सफलता उसका साथ देती है। वह भविष्य की विपत्तियों में उसका मित्र बनता है।
अंग्रेजी पाठ का मशीन अनुवाद (The Hymns of the Rigveda)। मूल पाठ का अनुवाद नहीं है। बेहतर अनुवाद सुझाएँ
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नया करार · प्रेरितों 10:34–35
Ἀνοίξας δὲ Πέτρος τὸ στόμα εἶπεν· Ἐπʼ ἀληθείας καταλαμβάνομαι ὅτι οὐκ ἔστιν προσωπολήμπτης ὁ θεός, ἀλλʼ ἐν παντὶ ἔθνει ὁ φοβούμενος αὐτὸν καὶ ἐργαζόμενος δικαιοσύνην δεκτὸς αὐτῷ ἐστιν.
पतरस ने अपना मुंह खोलकर कहा, “मैं सचमुच समझता हूँ कि परमेश्वर पक्षपात नहीं करता; परन्तु हर राष्ट्र में जो कोई उससे डरता है और धर्म का काम करता है, वह उसे स्वीकार्य है।”
अंग्रेजी पाठ का मशीन अनुवाद (World English Bible)। मूल पाठ का अनुवाद नहीं है। बेहतर अनुवाद सुझाएँ
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कुरान · 2:177 (अल-बकरा)
۞ لَّيْسَ ٱلْبِرَّ أَن تُوَلُّوا۟ وُجُوهَكُمْ قِبَلَ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ وَلَـٰكِنَّ ٱلْبِرَّ مَنْ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ وَٱلْكِتَـٰبِ وَٱلنَّبِيِّـۧنَ وَءَاتَى ٱلْمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ ذَوِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْيَتَـٰمَىٰ وَٱلْمَسَـٰكِينَ وَٱبْنَ ٱلسَّبِيلِ وَٱلسَّآئِلِينَ وَفِى ٱلرِّقَابِ وَأَقَامَ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَى ٱلزَّكَوٰةَ وَٱلْمُوفُونَ بِعَهْدِهِمْ إِذَا عَـٰهَدُوا۟ ۖ وَٱلصَّـٰبِرِينَ فِى ٱلْبَأْسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ وَحِينَ ٱلْبَأْسِ ۗ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ صَدَقُوا۟ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُتَّقُونَ ﴿١٧٧﴾
धर्म का अर्थ पूरब या पश्चिम की ओर मुख करना नहीं है। बल्कि, धर्मी वे हैं जो ईश्वर, अंतिम दिन, स्वर्गदूतों, पवित्र शास्त्र और पैगंबरों में विश्वास रखते हैं; और वे अपनी संजोई हुई संपत्ति अपने रिश्तेदारों, अनाथों, जरूरतमंदों, राहगीरों, भिखारियों और दासों को मुक्त कराने में देते हैं। वे प्रार्थना करते हैं और दान देते हैं। वे अपने वादों को पूरा करते हैं, और उत्पीड़न, कठिनाई और युद्ध के दौरान भी दृढ़ रहते हैं। यही सत्यवादी और धर्मी हैं।
अंग्रेजी पाठ का मशीन अनुवाद (One God One Message translation)। मूल पाठ का अनुवाद नहीं है। बेहतर अनुवाद सुझाएँ
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गुरु ग्रंथ साहिब · अंग 62 (श्री राग, गुरु नानक)
ਸਚਹੁ ਓਰੈ ਸਭੁ ਕੋ ਉਪਰਿ ਸਚੁ ਆਚਾਰੁ ॥੫॥
सत्य के आगे सब कुछ हीन है; सत्य का अभ्यास ही सब कुछ से श्रेष्ठ है।
अंग्रेजी पाठ का मशीन अनुवाद (The Sikh Religion (Macauliffe))। मूल पाठ का अनुवाद नहीं है। बेहतर अनुवाद सुझाएँ
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